लैक्टिहेप सिरप का उपयोग कब्ज़ में आराम देने के लिए किया जाता है, और डॉक्टर की सलाह पर लिवर की एक गंभीर बीमारी में दिमाग़ पर पड़ने वाले असर को रोकने में भी।
इस सिरप में लैक्टुलोज़ होता है। यह आंतों में पानी खींचकर मल को नरम बनाता है, जिससे मल त्याग आसान हो जाता है। लिवर की बीमारी में यह आंतों से उन तत्वों का सोखना कम करता है जो दिमाग़ पर असर डालते हैं।
सिरप को डॉक्टर की बताई गई मात्रा में, नापने वाले कप से लें। इसे पानी, जूस या दूध में मिलाकर भी लिया जा सकता है। असर आने में एक से तीन दिन लग सकते हैं, इसलिए धैर्य रखें और अपने आप मात्रा न बढ़ाएं। इसके साथ-साथ दिन भर पानी अच्छी तरह पिएं, खाने में रेशा बढ़ाएं और रोज़ थोड़ा चलना-फिरना रखें।
शुरुआत में पेट फूलना, गैस और मरोड़ आम है और आमतौर पर कुछ दिनों में कम हो जाती है। ज़्यादा मात्रा लेने पर दस्त हो सकते हैं, जिससे शरीर में पानी और नमक की कमी हो सकती है। शुगर की बीमारी हो, तो डॉक्टर को बताएं, क्योंकि इस सिरप में शर्करा होती है। गैलेक्टोज़ या लैक्टोज़ न पचने की शिकायत हो, तो भी बताएं। गर्भवती हों या स्तनपान करा रही हों, तो डॉक्टर से पूछकर ही लें। अगर पेट में तेज़ दर्द हो, उल्टी हो, मल में ख़ून आए, या पेट फूल जाए और हवा भी न निकले, तो दवा न लें और तुरंत डॉक्टर से मिलें।











































