Last updated on : 09 Nov, 2025
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सफेद मूसली, जिसे ‘श्वेत मूसली’ के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय आयुर्वेद में अपनी अद्वितीय स्वास्थ्य लाभों के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह एक प्राचीन जड़ी-बूटी है, जिसका उपयोग सदियों से पारंपरिक चिकित्सा में विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के सहायक समाधान के रूप में किया जा रहा है [1]। मुख्य रूप से भारत के जंगलों में पाई जाने वाली इस जड़ी-बूटी को पारंपरिक रूप से शारीरिक शक्ति और सहनशक्ति बढ़ाने के लिए जाना जाता है।
सफेद मूसली का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से उगाई जाने वाली जड़ी-बूटी है। आयुर्वेद के अनुसार, पारंपरिक अनुभवों के अनुसार, इसे ऊर्जा बनाए रखने, शारीरिक थकान के प्रबंधन और सामान्य तंदुरुस्ती को समर्थन देने के लिए आहार में शामिल किया जाता है। वर्तमान में, सफ़ेद मूसली का उपयोग न केवल आयुर्वेदिक चिकित्सा में बल्कि आहार पूरक (Dietary Supplements) के रूप में भी हो रहा है।
इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए इसका व्यापार तेजी से बढ़ रहा है और इसे विभिन्न रूपों में बाजार में उपलब्ध कराया जाता है, जैसे कि पाउडर, कैप्सूल, चूर्ण आदि। इस ब्लॉग में हम सफेद मूसली से संबंधित सभी तथ्यों को जानेंगे और देखेंगे कि इसे कैसे इस्तेमाल किया जाए ताकि हमारे स्वास्थ्य को अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके।
सफेद मूसली एक पौधा है जिसका वैज्ञानिक नाम Chlorophytum borivilianum है [2]। यह मुख्य रूप से भारत के जंगलों में पाया जाता है विशेषकर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के क्षेत्रों में। सफेद मूसली का पौधा छोटे आकार का होता है और इसमें लंबी, पतली पत्तियां होती हैं। इसकी जड़ें सफेद रंग की होती हैं जो पौधे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। इन जड़ों को सुखाकर पाउडर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। सफेद मूसली की उत्पत्ति भारतीय उपमहाद्वीप में मानी जाती है और इसे पारंपरिक रूप से आयुर्वेदिक उपचारों में उपयोग किया जाता रहा है। यह एक दुर्लभ जड़ी-बूटी है जिसे उगाना और संरक्षित करना थोड़ा कठिन होता है और इसीलिए इसका बाजार मूल्य भी काफी अधिक होता है। सफेद मूसली की विशेषता यह है कि इसमें प्राकृतिक रूप से मौजूद कई पोषक तत्व होते हैं [3]।
सफेद मूसली में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं जो इसे एक शक्तिशाली हर्बल औषधि बनाते हैं। इसमें प्रोटीन, विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स की अलग-अलग मात्राएं होती हैं जो शरीर को संपूर्ण पोषण प्रदान करने में सहायक हो सकती हैं।
| पोषक तत्व (Nutritional Component) | प्रति 100 ग्राम अनुमानित वैल्यू (Approx. Value per 100g) |
| कार्बोहाइड्रेट | 35-45 प्रतिशत |
| प्रोटीन | 5-10 प्रतिशत |
| फाइबर | 25-35 प्रतिशत |
| सैपोनिन्स | 2-6 प्रतिशत |
| एल्कलॉइड | 15-25 प्रतिशत |
सफेद मूसली को पारंपरिक रूप से एक रसायन या टॉनिक के रूप में उपयोग किया गया है [4]। इसमें सैपोनिन्स, फ्लैवोनॉयड्स और एंटीऑक्सीडेंट जैसे सक्रिय घटक पाए जाते हैं जो समग्र स्वास्थ्य को समर्थन कर सकते हैं। सफेद मूसली को आयुर्वेद में पौष्टिक गुणों से भरपूर एक महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी माना जाता है। पारंपरिक रूप से इसका उपयोग ऊर्जा स्तर को सपोर्ट करने, पाचन स्वास्थ्य को बनाए रखने और समग्र स्वास्थ्य में योगदान देने के लिए किया जाता रहा है [1]। इसमें मौजूद पोषक तत्व, जैसे कि कैल्शियम और अन्य खनिज तत्व, हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए सहायक हो सकते हैं।
यहाँ इसके प्रमुख गुणों को संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है:
आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार, सफेद मूसली मुख्य रूप से वात और पित्त को संतुलित करती है, लेकिन यह कफ दोष को बढ़ा सकती है [1]। इसलिए, कफ संबंधी समस्याओं में इसका सेवन सीमित मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह के साथ करना चाहिए।
आइए जानते हैं कि सफेद मूसली (Safed Musli ke Fayde) किन-किन स्वास्थ्य समस्याओं में उपयोगी हो सकती है और इसकी सही सेवन मात्रा क्या होनी चाहिए:
सफेद मूसली शारीरिक शक्ति और सहनशक्ति को सपोर्ट करने में सहायक मानी जाती है। यह एक प्रकार का एडाप्टोजेन है जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को सपोर्ट करता है और मानसिक व शारीरिक थकान से राहत देने में सहायक हो सकता है [3]।
सफेद मूसली में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को सपोर्ट करने में सहायक होते हैं। यह एक स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनकर मौसम परिवर्तन के दौरान शरीर की प्रतिक्रिया को संतुलित कर सकती है।
सफेद मूसली का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में पुरुषों और महिलाओं के सामान्य यौन स्वास्थ्य संतुलन हेतु किया जाता रहा है [4]। प्रारंभिक वैज्ञानिक अनुसंधान में इसे पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन और शुक्राणु मापदंडों (sperm parameters) में सुधार के लिए सहायक पाया गया है। हालांकि, किसी भी विशिष्ट यौन स्वास्थ्य स्थिति के लिए डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है [3], [4]।
सफेद मूसली में मौजूद एडाप्टोजेनिक गुण तनाव और अवसाद से निपटने में मदद करते हैं। यह शरीर और मन को शांत रखने में सहायक हो सकता है।
कुछ अध्ययन संकेत करते हैं कि पारंपरिक उपयोग के अनुसार सफेद मूसली में ऐसे यौगिक हो सकते हैं जो संतुलित आहार के साथ मिलकर रक्त शर्करा स्तर को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं [3]। यह डायबिटिक डाइट रूटीन के पूरक के रूप में उपयोग किया जा सकता है, परंतु यह केवल चिकित्सकीय सलाह के साथ ही संभव है।
सफेद मूसली में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले खनिज तत्व (जैसे कैल्शियम) हड्डियों की मजबूती और समग्र संरचनात्मक स्वास्थ्य के लिए सहायक हो सकते हैं।
सफेद मूसली के और भी कई स्वास्थ्य लाभ हैं, जो इसे एक पौष्टिक पूरक बनाते हैं:
हालांकि सफेद मूसली के कई फायदे हैं, लेकिन इसके कुछ संभावित नुकसान भी हो सकते हैं, खासकर यदि इसे अधिक मात्रा में या गलत तरीके से सेवन किया जाए:
सफेद मूसली का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है:
सफेद मूसली पुरुषों और महिलाओं के लिए ऊर्जा बढ़ाने, शरीर को मजबूत बनाने, और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद कर सकती है। यह शारीरिक कमजोरी और थकान को दूर करने में भी फायदेमंद है।
सफेद मूसली का प्रभाव व्यक्ति की जीवनशैली, आहार और शरीर की जैविक प्रतिक्रियाओं पर निर्भर करता है। कुछ उपयोगकर्ताओं को इसका उपयोग शुरू करने के 4-6 सप्ताह के भीतर बदलाव महसूस हो सकता है, हालांकि यह सभी के लिए एक जैसा नहीं होता।
सफेद मूसली का सेवन सामान्यतः 4-6 सप्ताह तक किया जा सकता है, फिर इसे 1-2 सप्ताह का ब्रेक लेकर पुनः लिया जा सकता है। लंबे समय तक सेवन के लिए चिकित्सक से परामर्श लेना उचित है।
सफेद मूसली का सामान्य रूप से कोई साइड इफेक्ट नहीं होता, लेकिन अधिक मात्रा में सेवन से पेट में गैस या अपच हो सकता है। यदि किसी को एलर्जी हो, तो चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।
सफेद मूसली को पुरुषों में शारीरिक ऊर्जा बनाए रखने, तनाव को कम करने और सामान्य स्वास्थ्य को समर्थन देने के लिए पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है। प्रारंभिक शोधों में इसे सहनशक्ति संतुलन और मानसिक थकान प्रबंधन में उपयोगी पाया गया है, लेकिन इसे किसी चिकित्सीय विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
[1] धाकड़, पी. के., मिश्रा, आर., मिश्रा, आई., और शर्मा, वी. (2024)। सफेद मूसली (Chlorophytum borivilianum) की चिकित्सीय क्षमता, फाइटोकेमिस्ट्री और पारंपरिक अनुप्रयोगों पर एक संक्षिप्त समीक्षा। करंट ट्रेडिशनल मेडिसिन, 10(4), 138-148। https://www.benthamdirect.com/content/journals/ctm/10.2174/2215083810666230809103444
[2] धायल, पी. (2022)। सफ़ेद मूसली की उपज, गुणवत्ता और पोषक तत्वों के अवशोषण पर समृद्ध खाद और ह्यूमिक एसिड का प्रभाव (डॉक्टरेट शोध प्रबंध, डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ)। https://krishikosh.egranth.ac.in/server/api/core/bitstreams/e911b426-ac62-439f-85ee-c0ba66312382/content
[3] ग्गल, वी., शर्मा, ओ., और गर्ग, एन. (2021)। Chlorophytum borivilianum (सफेद मूसली): एक महत्वपूर्ण हर्बल औषधि। वर्ल्ड जर्नल ऑफ़ फ़ार्मेसी एंड फ़ार्मास्यूटिकल साइंसेज़, 10(8), 1083-1092। https://wjpr.s3.ap-south-1.amazonaws.com/article_issue/90ff297e40367d97332d4c10d9752687.pdf
[4] ग्रोवर, एम. (2021)। Chlorophytum borivilianum (सफेद मूसली): प्रकृति का अद्भुत उपहार। आयुर्वेद एवं एकीकृत चिकित्सा विज्ञान जर्नल, 6(4), 93-102। https://www.jaims.in/jaims/article/view/1400
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