अगर आप जानना चाहते हैं कि विटामिन D की कमी से क्या होता है, तो आप अकेले नहीं हैं। भारत में पूरे साल भरपूर धूप मिलने के बावजूद, देश के कुछ जनसंख्या समूहों में विटामिन D की कमी 70 से 100% तक पाई जाती है[1]।
इसके पीछे घर के अंदर अधिक समय बिताना, वायु प्रदूषण और विटामिन D के सीमित खाद्य स्रोत जैसे कई कारण हो सकते हैं। विटामिन D हड्डियों के स्वास्थ्य, इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) के कार्य और संपूर्ण सेहत के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस लेख में विटामिन D की कमी के सामान्य लक्षणों, भारत में इस स्थिति के व्यापक होने के कारणों और भारतीय घरों में आसानी से उपलब्ध विटामिन D से भरपूर खाद्य पदार्थों के बारे में जानकारी दी गई है। यह सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी है, किसी बीमारी के निदान का साधन नहीं है।
मुख्य बातें
- भरपूर धूप मिलने के बावजूद, भारत में कुछ जनसंख्या समूहों में विटामिन D की कमी 100% तक पाई जाती है।
- बड़ों में विटामिन D की कमी के सामान्य लक्षणों में हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी और थकान शामिल हैं।
- भारतीय खाद्य स्रोतों में वसायुक्त मछली, अंडे, फोर्टिफाइड दूध और धूप के संपर्क में आए मशरूम शामिल हैं।
- अधिकांश बड़ों के लिए विटामिन D की सुझाई गई दैनिक मात्रा 600 आईयू (15 माइक्रोग्राम) है।
- विटामिन D की स्थिति का आकलन करने के लिए 25-हाइड्रॉक्सीविटामिन D की मात्रा मापने वाली खून की जाँच का आमतौर पर उपयोग किया जाता है।
विटामिन D क्या है और यह क्यों जरूरी है?
विटामिन D एक वसा में घुलनशील विटामिन है, जिसे आपका शरीर तब बना सकता है जब आपकी त्वचा सूर्य की रोशनी से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट B (यूवीबी) किरणों के संपर्क में आती है। यह शरीर में कैल्शियम और फॉस्फेट के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। ये दोनों स्वस्थ हड्डियों, दांतों और मांसपेशियों को बनाए रखने के लिए आवश्यक पोषक तत्व हैं[2]।
हड्डियों के स्वास्थ्य के अलावा, विटामिन D इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) के कामकाज में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह सूजन से जुड़ी प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करके और इंफेक्शन से शरीर की रक्षा करने में मदद करके इम्यून सिस्टम को सही ढंग से काम करने में सहायता करता है[3]। जब शरीर में विटामिन D का स्तर बहुत कम हो जाता है, तो शरीर को कैल्शियम का सही तरीके से अवशोषण करने में परेशानी हो सकती है और इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) भी ठीक से काम नहीं कर पाता[2]।
भारत में धूप होने के बावजूद विटामिन D की कमी क्यों है?
धूप विटामिन D का प्रमुख स्रोत है, और शरीर का लगभग 80 से 90% विटामिन D आमतौर पर सूर्य की रोशनी के संपर्क में आने के बाद त्वचा में बनता है[4]। इसके बावजूद, कई कारक भारतीयों में शरीर में पर्याप्त विटामिन D के स्तर को बनाए रखने में बाधा डाल सकते हैं। इसके प्रमुख जोखिम कारक इस प्रकार हैं:
- वायु प्रदूषण: विटामिन D के बनने के लिए आवश्यक यूवीबी किरणों को रोकता है[5]।
- घर के अंदर की लाइफस्टाइल: ऑफिस की नौकरियों और बाहर कम समय बिताने से धूप का संपर्क कम हो जाता है[5]।
- कपड़े पहनने का तरीका: शरीर की अधिकांश त्वचा ढकी रहने से यूवी किरणों का संपर्क सीमित हो जाता है[1]।
- त्वचा का रंग: गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों को समान मात्रा में विटामिन D बनाने के लिए अधिक समय तक धूप के संपर्क में रहने की आवश्यकता होती है[1]।
- फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों की सीमित उपलब्धता: कुछ देशों के विपरीत, भारत में दूध आमतौर पर विटामिन D से फोर्टिफाइड नहीं होता है[2]।
- मौसम और अक्षांश: ये कारक त्वचा तक पहुँचने वाली यूवीबी विकिरण की मात्रा को प्रभावित करते हैं[1]।
इन सभी कारकों के संयोजन से यह समझने में मदद मिलती है कि धूप वाले देश में भी विटामिन D की कमी की दर अधिक क्यों बनी रहती है[1]।
विटामिन D की कमी के क्या लक्षण होते हैं?
विटामिन D की कमी के लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते, इसलिए कई बार इन पर ध्यान नहीं जाता। इसके कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:
बड़ों में दिखने वाले सामान्य लक्षण
विटामिन D की कमी वाले बड़ों में आमतौर पर ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं[6],[7]:
- हड्डियों में दर्द: विटामिन D की गंभीर कमी से हड्डियों में दर्द और छूने पर संवेदनशीलता हो सकती है। ऐसा खासतौर पर तब होता है, जब इसकी कमी से ऑस्टियोमलेशिया (हड्डियों का नरम होना) हो जाता है।
- मांसपेशियों में कमजोरी: आपको सीढ़ियाँ चढ़ने या बैठने के बाद उठने में परेशानी हो सकती है।
- थकान: विटामिन D की कमी वाले कुछ लोगों को थकान या बहुत ज़्यादा थकावट महसूस हो सकती है, लेकिन इन लक्षणों के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं।
बच्चों में लक्षण
विटामिन D की कमी वाले बच्चों में निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं[7]:
- चिड़चिड़ापन और सुस्ती: बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है और वे सुस्त महसूस कर सकते हैं।
- वृद्धि धीमी होना और शारीरिक विकास में देरी: बच्चों की वृद्धि धीमी हो सकती है और उनका शारीरिक विकास देर से हो सकता है।
- हड्डियों में बदलाव: विटामिन D की गंभीर कमी से रिकेट्स (बच्चों में हड्डियों का कमजोर और नरम होना) हो सकता है, जिससे हड्डियां नरम और कमजोर हो सकती हैं और कंकाल में विकृतियां हो सकती हैं।
ये लक्षण विशिष्ट नहीं हैं और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों में भी हो सकते हैं। विटामिन D की स्थिति का आकलन करने के लिए 25-हाइड्रॉक्सीविटामिन D [25(ओएच)D] की मात्रा मापने वाली खून की जाँच का उपयोग किया जाता है। यदि आपके लक्षण लगातार बने रहते हैं या आप विटामिन D की कमी के जोखिम में हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करें।
विटामिन D से भरपूर भारतीय खाद्य पदार्थ कौन से हैं?
केवल भोजन से पर्याप्त विटामिन D प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि केवल कुछ ही खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से विटामिन D की महत्वपूर्ण मात्रा पाई जाती है। इसके अच्छे आहार स्रोतों में वसायुक्त मछली, अंडे की जर्दी और अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में आए मशरूम शामिल हैं, जबकि फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ अतिरिक्त विटामिन D प्रदान कर सकते हैं[2][8][9]:
खाद्य स्रोत | विटामिन D का योगदान | टिप्पणी |
|---|---|---|
वसायुक्त मछली | प्राकृतिक रूप से भरपूर स्रोत | सैल्मन, मैकेरल और अन्य तैलीय मछलियां प्राकृतिक खाद्य स्रोतों में विटामिन D के सबसे अच्छे स्रोतों में शामिल हैं। |
अंडे, खासकर जर्दी | विटामिन D होता है | अंडे की जर्दी में प्राकृतिक रूप से विटामिन D मौजूद होता है। |
धूप के संपर्क में आए मशरूम | विटामिन D प्रदान कर सकते हैं | अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में आने से इनमें विटामिन D की मात्रा बढ़ सकती है। |
फोर्टिफाइड दूध | अलग-अलग हो सकता है | यह सुनिश्चित करने के लिए लेबल देखें कि इसमें विटामिन D मिलाया गया है या नहीं। |
फोर्टिफाइड नाश्ते के अनाज | मात्रा अलग-अलग हो सकती है | विटामिन D की मात्रा उत्पाद के अनुसार अलग-अलग होती है, इसलिए पोषण संबंधी लेबल देखें। |
फोर्टिफाइड दही | मात्रा अलग-अलग हो सकती है | विटामिन D की मात्रा उत्पाद के अनुसार अलग-अलग होती है, इसलिए पोषण संबंधी लेबल देखें। |
शाकाहारियों के लिए, धूप के संपर्क में आए मशरूम और दूध व अनाज जैसे विटामिन D से फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ विटामिन D के स्रोत हो सकते हैं। फोर्टिफाइड उत्पादों की पहचान करने के लिए खाद्य पदार्थों के लेबल देखें[8][9]।
जिन लोगों को अपने आहार या धूप के संपर्क से पर्याप्त विटामिन D नहीं मिलता है, उनके लिए फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ या सप्लीमेंट्स विटामिन D की आवश्यक मात्रा पूरी करने में मदद कर सकते हैं।
क्या धूप काफी है या सप्लीमेंट भी जरूरी है?
धूप विटामिन D का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन त्वचा में बनने वाले विटामिन D की मात्रा हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है।
कितनी देर धूप में रहना काफी है?
धूप में रहने की कोई एक निश्चित अवधि नहीं है, जो सभी लोगों के लिए उपयुक्त हो। भारत के कुछ क्षेत्रों में दोपहर की धूप में लगभग 10 से 15 मिनट रहना पर्याप्त हो सकता है, जबकि अधिक अक्षांश वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को खासकर सर्दियों के दौरान 10 से 45 मिनट तक धूप में रहने की ज़रूरत हो सकती है।
धूप में रहने का आवश्यक समय त्वचा के प्रकार, मौसम और दिन के समय जैसे कारकों पर भी निर्भर करता है। ये केवल सामान्य अनुमान हैं। वास्तव में, हर व्यक्ति को कितनी देर धूप में रहना चाहिए, यह अलग-अलग हो सकता है। ऐसी तेज़ या लंबे समय तक धूप में रहने से बचें, जिससे त्वचा पर सनबर्न हो सकता है[10]।
रोज़ाना कितनी मात्रा में विटामिन D लेना चाहिए?
शरीर को आवश्यक विटामिन D की मात्रा उम्र के अनुसार अलग-अलग होती है। सुझाई गई आहार मात्रा (आरडीए) वह मात्रा है जिसकी सलाह अधिकांश स्वस्थ लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए दी जाती है, जैसा कि नीचे दी गई तालिका में बताया गया है[11][12]:
आयु वर्ग | सुझाई गई दैनिक मात्रा |
|---|---|
शिशु (1 वर्ष से कम) | 400 आईयू |
बच्चे और किशोर (1 से 18 वर्ष) | 600 आईयू |
बड़ों | 600 आईयू |
सप्लीमेंट की सलाह कब दी जाती है
जिन लोगों में विटामिन D की कमी का जोखिम अधिक होता है, जैसे कि जिनका धूप से संपर्क सीमित है, उन्हें विटामिन D सप्लीमेंट्स की आवश्यकता हो सकती है। सप्लीमेंट लेने की आवश्यकता व्यक्ति के आहार, धूप के संपर्क, स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों और विटामिन D की स्थिति पर निर्भर करती है[2]। अधिकांश बड़ों के लिए, प्रतिदिन 4,000 आईयू (100 माइक्रोग्राम) आमतौर पर सुरक्षित मानी जाने वाली अधिकतम दैनिक मात्रा है। यह सुरक्षा की ऊपरी सीमा है, सुझाई गई दैनिक खुराक नहीं[13]।
समय के साथ बहुत अधिक विटामिन D लेने से विषाक्तता हो सकती है और खून में कैल्शियम का स्तर बढ़ सकता है। यदि आपको सुझाई गई दैनिक मात्रा से अधिक खुराक लेने की आवश्यकता है, तो अपने डॉक्टर से बात करें[14]।
निष्कर्ष
भारत में भरपूर धूप मिलने के बावजूद विटामिन D की कमी आश्चर्यजनक रूप से आम है। हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों मेंकमजोरी और थकान सहित इसके लक्षण अक्सर तब तक नज़रअंदाज़ हो जाते हैं, जब तक विटामिन D की कमी गंभीर नहीं हो जाती। सुरक्षित तरीके से धूप के संपर्क में रहने और वसायुक्त मछली, अंडे व फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों जैसे विटामिन D से भरपूर खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करने से विटामिन D का पर्याप्त स्तर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। यदि आपको विटामिन D की कमी होने का संदेह है, तो अपने डॉक्टर से खून की जाँच कराने के लिए कहें। उचित जागरूकता और लाइफस्टाइल में आसान बदलावों के साथ, अधिकांश लोगों के लिए विटामिन D का स्वस्थ स्तर बनाए रखना संभव है।
संदर्भ सूची
Kamboj, P., Dwivedi, S., & Toteja, G. (2018). Prevalence of hypovitaminosis D in India & way forward. The Indian Journal of Medical Research, 148(5), 548–556. https://doi.org/10.4103/ijmr.ijmr_1807_18
National Health Service. (2020). Vitamin D. NHS UK. https://www.nhs.uk/conditions/vitamins-and-minerals/vitamin-d/
Metabolites. (2025). Vitamin D and its role in rheumatic diseases. PMC. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC12029499/
Sreenivasulu, K., Banerjee, M., Tomo, S., Shukla, K., Selvi, M. K., Garg, M. K., Banerjee, S., Sharma, P., & Shukla, R. (2024). Seasonal variation and Vitamin-D status in ostensibly healthy Indian population: An experience from a tertiary care institute. Metabolism open, 23, 100298. https://doi.org/10.1016/j.metop.2024.100298















