थायरोक्सिन सोडियम का उपयोग हाइपोथायरॉयडिज़्म (थायरॉयड हार्मोन की कमी) के इलाज के लिए किया जाता है। यह ऐसी स्थिति है जिसमें थायरॉयड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बनाती, जिससे मेटाबॉलिज्म (शरीर में ऊर्जा बनने की प्रक्रिया) धीमा हो जाता है। यह दवा शरीर में थायरॉयड हार्मोन की कमी को पूरा करती है। थायरॉयड हार्मोन शरीर द्वारा ऊर्जा के उपयोग को नियंत्रित करने के साथ पाचन तंत्र, हृदय, मांसपेशियों, मस्तिष्क के विकास और हड्डियों के स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
थायरोक्सिन सोडियम की सही खुराक लेने पर आमतौर पर साइड इफेक्ट्स नहीं होते। निम्नलिखित लक्षण प्रायः आवश्यकता से अधिक खुराक होने पर दिखाई देते हैं:
भूख बढ़ना
वजन कम होना
दस्त
मांसपेशियों में ऐंठन
सिरदर्द
घबराहट, कंपकंपी, अधिक पसीना आना, नींद न आना या दिल की धड़कन तेज़ होना भी खुराक अधिक होने के संकेत हो सकते हैं। सीने में दर्द, बहुत तेज़ या अनियमित धड़कन, साँस लेने में कठिनाई, बेहोशी या दौरे पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
थायरोक्सिन सोडियम शरीर में कम हुए टी4 हार्मोन की पूर्ति करता है। शरीर के विभिन्न ऊतकों में टी4 का कुछ भाग टी3 में बदल जाता है। टी3 कोशिका केंद्रक में मौजूद थायरॉयड हार्मोन रिसेप्टर से जुड़कर डीएनए प्रतिलेखन और प्रोटीन निर्माण को नियंत्रित करता है। थायरॉयड हार्मोन के अधिकांश शारीरिक प्रभाव टी3 के माध्यम से होते हैं और शरीर में मौजूद लगभग 80% टी3, टी4 से आयोडीन हटने की प्रक्रिया द्वारा बनता है।

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MBBS, DNB (OBGY)
थायरोक्सिन सोडियम मुख्य रूप से मुँह से ली जाने वाली टैबलेट के रूप में उपलब्ध है। कुछ उत्पाद कैप्सूल या मुँह से लिए जाने वाले तरल रूप में भी उपलब्ध हो सकते हैं। नस के माध्यम से दिया जाने वाला रूप विशेष गंभीर स्थितियों में अस्पताल में उपयोग किया जाता है।
यह दवा वयस्कों, बच्चों और नवजात शिशुओं को दी जा सकती है। इसकी खुराक केवल शरीर के वजन के आधार पर निर्धारित नहीं होती। डॉक्टर आयु, वजन, हृदय की स्थिति, गर्भावस्था, अन्य बीमारियों, साथ में ली जा रही दवाओं और थायरॉयड जाँच के परिणामों के आधार पर खुराक निर्धारित करते हैं। खुराक अपने आप न बदलें।
जिन मरीज़ों में एड्रिनल ग्रंथि (किडनी के ऊपर स्थित हार्मोन बनाने वाली ग्रंथि) ठीक से काम नहीं करती और इस समस्या का अभी इलाज शुरू नहीं हुआ है, उन्हें यह दवा नहीं लेनी चाहिए। किसी विशेष उत्पाद के किसी घटक से गंभीर एलर्जी होने पर उस उत्पाद का उपयोग न करें।
थायरोक्सिन सोडियम का उपयोग मोटापे के इलाज या वजन घटाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। आवश्यकता से अधिक खुराक लेने पर गंभीर और जानलेवा समस्याएँ हो सकती हैं।
कैल्शियम या आयरन वाले पूरक, एंटासिड, सुक्रालफेट और पित्त अम्ल को बाँधने वाली दवाएँ, जैसे कोलेसेवेलम और कोलेस्टाइरामाइन, थायरोक्सिन सोडियम के अवशोषण को कम कर सकती हैं। इन्हें सामान्यतः थायरोक्सिन सोडियम से कम से कम 4 घंटे के अंतर पर लिया जाता है। एसोमेप्राज़ोल जैसी पेट का एसिड कम करने वाली दवाएँ भी इसके अवशोषण को प्रभावित कर सकती हैं।
डायबिटीज़ की दवाओं, वारफेरिन, डिजिटैलिस, एस्ट्रोजन युक्त गर्भनिरोधक और एमिट्रिप्टिलाइन या मैप्रोटीलाइन जैसी अवसादरोधी दवाओं के साथ जाँच या खुराक में बदलाव की आवश्यकता हो सकती है। इन दवाओं को अपने आप बंद न करें और डॉक्टर को अपनी सभी दवाओं तथा पूरकों की जानकारी दें।
बायोटिन युक्त पूरक थायरॉयड जाँच के गलत परिणाम दे सकते हैं। जाँच से पहले इन्हें रोकने के संबंध में डॉक्टर से सलाह लें।
इस दवा का अत्यधिक दवा सेवन करने से तेज़ या अनियमित धड़कन, सीने में दर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, सिरदर्द, घबराहट, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, कंपकंपी, मांसपेशियों में कमजोरी, अधिक पसीना, भूख बढ़ना, वजन कम होना, दस्त और गर्मी सहन न कर पाना जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। गंभीर मामलों में भ्रम, दौरे, बेहोशी या अन्य जानलेवा समस्याएँ हो सकती हैं। लक्षण अत्यधिक दवा सेवन के कई दिन बाद भी दिखाई दे सकते हैं। सुझाई गई खुराक से अधिक लेने पर तुरंत डॉक्टर या आपातकालीन चिकित्सा सेवा से संपर्क करें।
यदि आप एक खुराक लेना भूल जाएँ, तो याद आते ही उसे लें। यदि अगली खुराक का समय पास है, तो छूटी हुई खुराक छोड़ दें और अगली खुराक सामान्य समय पर लें। छूटी हुई खुराक की भरपाई के लिए एक साथ 2 खुराक न लें।
इस दवा से होने वाले अधिकांश लक्षण आवश्यकता से अधिक खुराक के कारण हो सकते हैं। दवा अपने आप बंद न करें और खुराक में बदलाव न करें। डॉक्टर थायरॉयड जाँच करवाकर खुराक में आवश्यक बदलाव कर सकते हैं।
सीने में दर्द, बहुत तेज़ या अनियमित धड़कन, साँस लेने में कठिनाई, चेहरे या गले में सूजन, बेहोशी अथवा दौरे पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
थायरोक्सिन सोडियम से सामान्यतः वाहन या मशीन चलाने की क्षमता प्रभावित होने की उम्मीद नहीं होती। यदि दवा लेने के बाद चक्कर, कमजोरी, तेज़ धड़कन या ध्यान प्रभावित करने वाला कोई अन्य लक्षण हो, तो सामान्य महसूस होने तक वाहन या भारी मशीन न चलाएँ।
थायरोक्सिन सोडियम गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान लिया जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान इसे बंद नहीं करना चाहिए, क्योंकि हाइपोथायरॉयडिज़्म का इलाज न होने पर माँ और शिशु दोनों को नुकसान हो सकता है।
गर्भावस्था की पुष्टि होते ही डॉक्टर को बताएँ। इस दौरान खुराक बढ़ाने और थायरॉयड की अधिक बार जाँच करने की आवश्यकता हो सकती है। स्तनपान के दौरान भी डॉक्टर द्वारा बताई गई खुराक जारी रखें।
हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, एड्रिनल ग्रंथि (किडनी के ऊपर स्थित हार्मोन बनाने वाली ग्रंथि) की अपर्याप्तता, पिट्यूटरी ग्रंथि की समस्या, हड्डियों की कमजोरी या अनियमित धड़कन वाले मरीज़ों को यह दवा सावधानी से लेनी चाहिए। बुज़ुर्ग मरीज़ों में उपचार कम खुराक से शुरू किया जा सकता है।
किडनी या लिवर की बीमारी होने पर डॉक्टर को बताएँ। इन बीमारियों और इनके उपचार में उपयोग होने वाली अन्य दवाओं के कारण थायरॉयड जाँच और खुराक की अधिक निगरानी आवश्यक हो सकती है।
कैल्शियम और आयरन वाले पूरक तथा कुछ एंटासिड इससे कम से कम 4 घंटे के अंतर पर लें।
कॉफ़ी, सोया, अधिक रेशेदार भोजन और अखरोट इसके अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं। इन्हें पूरी तरह छोड़ना आवश्यक नहीं है, लेकिन दवा और भोजन के समय में नियमितता बनाए रखें। अपने आहार में बड़ा बदलाव करने पर डॉक्टर को बताएँ।
संतुलित आहार लें। आयोडीन या समुद्री शैवाल वाले पूरक डॉक्टर की सलाह के बिना न लें, क्योंकि अधिक आयोडीन थायरॉयड की समस्या को बिगाड़ सकता है। हाइपोथायरॉयडिज़्म होने का अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति में कैल्शियम या विटामिन डी की कमी होगी या उसे अधिक प्रोटीन लेना होगा। पत्तागोभी, ब्रोकोली, केल और पालक जैसी सब्ज़ियों को सामान्य मात्रा में पूरी तरह छोड़ने की आवश्यकता नहीं होती। नियमित शारीरिक गतिविधि समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, लेकिन यह दवा का विकल्प नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कुछ लक्षणों में सुधार होने में कई सप्ताह लग सकते हैं। किसी निश्चित खुराक का पूरा प्रभाव सामान्यतः 4 से 6 सप्ताह में दिखाई देता है। उपचार शुरू करने या खुराक बदलने के लगभग 6 से 8 सप्ताह बाद डॉक्टर थायरॉयड जाँच करवा सकते हैं।
अधिवृक्क ग्रंथि की अनुपचारित अपर्याप्तता होने पर यह दवा नहीं लेनी चाहिए। हृदय रोग, डायबिटीज़, हड्डियों की कमजोरी या अनियमित धड़कन होने पर डॉक्टर को बताएँ। यह दवा वजन घटाने या मोटापे के इलाज के लिए नहीं है। अधिक खुराक गंभीर और जानलेवा समस्याएँ पैदा कर सकती है।
नहीं। डॉक्टर से सलाह लिए बिना थायरोक्सिन सोडियम लेना बंद न करें। अधिकांश मरीज़ों को यह दवा लंबे समय तक या जीवन भर लेनी पड़ सकती है। इसे बंद करने पर हाइपोथायरॉयडिज़्म के लक्षण दोबारा उभर सकते हैं।
किडनी या लिवर की बीमारी के आधार पर हर मरीज़ के लिए खुराक में बदलाव आवश्यक नहीं होता। हालांकि, गंभीर बीमारी थायरॉयड जाँच के परिणामों या दवा की आवश्यकता को प्रभावित कर सकती है। ऐसी कोई समस्या होने पर डॉक्टर को बताएँ और नियमित जाँच करवाएँ।
डॉक्टर द्वारा निर्धारित सही खुराक लेने पर थायरोक्सिन सोडियम से प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं होती। अनुपचारित हाइपोथायरॉयडिज़्म या आवश्यकता से अधिक खुराक मासिक धर्म और प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। गर्भधारण की योजना बनाने पर डॉक्टर से सलाह लें।
थायरोक्सिन सोडियम का उपयोग हाइपोथायरॉयडिज़्म (थायरॉयड हार्मोन की कमी) के इलाज के लिए किया जाता है। यह शरीर में कम हुए थायरॉयड हार्मोन की पूर्ति करके सामान्य हार्मोन स्तर बनाए रखने में मदद करता है। इससे मेटाबॉलिज्म (शरीर में ऊर्जा बनने की प्रक्रिया), ऊर्जा के उपयोग तथा हृदय, मस्तिष्क, मांसपेशियों और हड्डियों के सामान्य कार्य को बनाए रखने में मदद मिलती है।
अन्य सॉल्ट्स में उपलब्ध (थायरोक्सिन)








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