बेंज़ॉयल पेरोक्साइड एक एंटीबैक्टीरियल (जीवाणुरोधी) और सूजन को कम करने वाला तत्त्व है।
यह सक्रिय ऑक्सीजन कणों को मुक्त करके कार्य करता है, जो प्रोपियोनिबैक्टीरियम एक्नेस (मुहांसों का प्रमुख कारण बनने वाला जीवाणु) के प्रोटीन का ऑक्सीकरण करते हैं। इससे तैलीय रोमछिद्रों में इस जीवाणु की मात्रा कम हो जाती है, जिससे इसकी सक्रियता घटती है। यह त्वचा की सबसे बाहरी कोशिकाओं के बीच के जुड़ाव को भी ढीला करता है, जिससे मृत कोशिकाओं का प्राकृतिक रूप से हटना बढ़ता है। इससे बंद रोमछिद्रों को खोलने में सहायता मिलती है और ब्लैकहेड्स तथा व्हाइटहेड्स बनने से रोका जा सकता है। अंततः, इसका सूजन-रोधी प्रभाव भी होता है। प्रोपियोनिबैक्टीरियम एक्नेस की संख्या कम करके यह सूजन से संबंधित पदार्थों के निर्माण को घटाता है, जो मुहांसों में लालिमा और सूजन के लिए उत्तरदायी होते हैं। इस प्रकार, यह दवा मुहांसों के प्रबंधन में प्रभावी होती है।

PhD in Chemistry

BDS, MDS, PGCCL, PGDMH
अधिकांश साइड इफेक्ट्स अस्थायी और आमतौर पर हानिरहित होते हैं तथा दवा बंद करने पर ठीक हो जाते हैं। हालांकि, यदि आपको कोई गंभीर साइड इफेक्ट या किसी भी लक्षण में वृद्धि का अनुभव हो, तो कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नहीं, बेंज़ॉयल पेरोक्साइड एंटीबायोटिक नहीं है। यह एक प्रकार का कार्बनिक पेरोक्साइड यौगिक है, जिसमें एंटीबैक्टीरियल (जीवाणुरोधी), केराटोलिटिक और कॉमेडोलिटिक गुण होते हैं, और यह मुहासों को नियंत्रित करने में मदद करता है।
हालांकि बेंज़ॉयल पेरोक्साइड मुख्य रूप से मुहासों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन कभी-कभी चिकित्सकीय परामर्श के तहत इसका उपयोग रोसेशिया (चेहरे की त्वचा पर लालिमा और सूजन), फॉलिकुलाइटिस (बालों की जड़ों का संक्रमण) और सेबोरहाइक डर्माटाइटिस (सिर या चेहरे पर खुजली, लालपन और सफेद परत (रूसी) वाली त्वचा की बीमारी) जैसी अन्य त्वचा संबंधी समस्याओं के नियंत्रण के लिए भी किया जाता है।
जी हां, बेंज़ॉयल पेरोक्साइड लगाने के बाद सनस्क्रीन (धूप से बचाने वाली क्रीम) का उपयोग करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इस दवा का इस्तेमाल करते समय लंबे समय तक धूप में रहने से त्वचा में जलन हो सकती है।
बेंज़ॉयल पेरोक्साइड मुहासे पैदा करने वाले जीवाणुओं को कम करके और रोमछिद्रों को साफ करके काम करता है। हार्मोनों पर इसका कोई ज्ञात प्रभाव नहीं है।
शुरुआती हफ्तों में बेंज़ॉयल पेरोक्साइड के इस्तेमाल से त्वचा पर पिंपल्स और ब्लैकहेड्स (बालों के रोमछिद्रों में रुकावट के कारण होने वाले छोटे दाने) उभर सकते हैं। यह एक सामान्य और अस्थायी प्रक्रिया है और इसका मतलब यह नहीं है कि आपके मुहासे बढ़ रहे हैं।
लगातार इस्तेमाल करने पर 1–2 सप्ताह में आपको कुछ सुधार नज़र आ सकता है, और अधिकतम लाभ 4–8 सप्ताह में मिलता है।
डॉक्टर द्वारा सुझाए गए अनुसार बेंज़ॉयल पेरोक्साइड को प्रतिदिन लगाया जा सकता है, लेकिन कम सांद्रता से शुरू करना और आवश्यकतानुसार धीरे-धीरे बढ़ाना समझदारी है, खासकर यदि त्वचा में जलन होती है।
बेंज़ॉयल पेरोक्साइड मुहासे पैदा करने वाले जीवाणुओं को नष्ट करता है और बंद रोमछिद्रों को खोलने में मदद करता है। यह मुहासों में लालपन और सूजन को भी कम करता है।








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